रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा अध्ययन किए जाने की आश्वयकता है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी।
रामसेतु को तोड़ने पर गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई अंतरिम रोक को हटाने के लिए केन्द्र के भी कोर्ट से अपील करने की संभावना है। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम और न्यायमूर्ति जीएम पांचाल की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रही है जिनमें न्यायालय से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है कि रामसेतु राष्ट्रीय धरोहर है और इसलिए इसे न तो तोड़ा जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
न्यायालय ने केन्द्र को सेतुसमुद्रम परियोजना को पूरा करने के दौरान रामसेतु को क्षति पहुँचाने से भी बचने को कहा है, लेकिन केन्द्र मंगलवार को न्यायालय से यह कहने जा रहा है कि वह सेतुसमुद्रम परियोजना पूरा करना चाहता है और रामसेतु को प्राकृतिक निर्मित बताते हुए उसे हटाना चाहता है।
याचिकाकर्ताओं ने इसके मानव निर्मित होने का दावा किया है। केन्द्र द्वारा यह भी बताने की संभावना है कि इस संबंध में एएसआई से अध्ययन कराने की आवश्यकता नहीं है।