एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के कबायली इलाकों में आठ हजार से अधिक विदेशी आतंकवादी मौजूद हैं। हालाँकि पाकिस्तान सरकार इस संख्या की आधिकारिक तौर पर पुष्टि करने से इनकार कर रही है।
प्रधानमंत्री और पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी की मौजूदगी में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में गृहमंत्री रहमान मलिक ने कहा यदि बातचीत की प्रक्रिया से हल नहीं निकलता है तो सरकार बल प्रयोग करेगी। उनके मुताबिक विदेशी आतंकवादियों की संख्या करीब एक हजार है। कबायली क्षेत्र के मंत्री हमिदुल्ला जान ने मलिक की राय का विरोध किया।
'द न्यूज' ने प्रधानमंत्री के हवाले से कहा है कि गिलानी और उनके कुछ मंत्री सोमवार या मंगलवार को पेशावर का दौरा कर विशेष बैठक करेंगे, जिसमें कबायली क्षेत्रों में विदेशी आतंकवादियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि यह हाल में बारा क्षेत्र में चलाए गए प्रभावी अभियान जैसा होगा। सूचना मंत्री शेरी रहमान ने विदेशी आतंकवादियों को खदेड़ देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री को पेश इस रिपोर्ट के मुताबिक इन विदेशी आतंकवादियों में से अधिकतर उत्तर एवं दक्षिणी वजीरिस्तान तथा बाजौर में छिपे हैं। यह भी कहा गया है कि विदेशी खुफिया एजेंसियाँ तालिबान और अल कायदा की आड़ में अफगानिस्तान के रास्ते अपने एजेंट पाकिस्तान के कबायली इलाकों में भेज रही हैं, जो स्थानीय लोगों को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भड़का रहे हैं।
दूसरी ओर तालिबान के सूत्र यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके क्षेत्रों में हजारों विदेशी आतंकवादी शरण लिए हुए हैं। वे कहते हैं कि इनकी संख्या सैकड़ों में हो सकती है और इनमें से अधिकतर यहाँ तब से डेरा डाले हैं, जब अमेरिका और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई के लिए यहाँ भेजा था।