पाकिस्तानी सेना ने अपने सैन्य अभियान जर्ब-ए-कलीम के तहत 15 तालिबानी उग्रवादियों को मार गिराने और 60 को बंदी बनाने का दावा किया है।
उधर तालिबानी आतंकवादियों ने चेतावनी दी है कि अगर उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत में सैन्य अभियान नहीं रोका गया तो वे बंधक बनाए गए 29 सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षाबलों के जवानों की हत्या कर देंगे। इन्हें पिछले सप्ताह हंगू में उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत सरकार द्वारा अभियान शुरू करने से पहले ही तालिबान ने बंधक बना लिया था।
अधिकारियों के हवाले से टीवी चैनलों ने खबर दी कि सुरक्षाबलों ने हेलिकॉप्टर और मोर्टार से तालिबान के ठिकानों पर हमला किया। इससे पहले तालिबान ने हंगू प्रांत के तोरावारी इलाके में अर्द्धसैन्य बलों के गढ़ पर आक्रमण किया था। इसमें फ्रंटियर कॉर्प्स के तीन जवान घायल बताए गए हैं। बंदूकों से लैस हेलीकाप्टरों ने कुर्रम कबाइली एजेंसी स्थित तालिबान के तीन ठिकानों पर हमला किया। यह क्षेत्र सीमावर्ती हंगू जिले से सटा है। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में एक नागरिक भी घायल हुआ है। इस हमले में 15 तालिबान मारे गए और 60 बंदी बना लिए गए।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता मौलवी ओमर ने मीडिया से फोन पर कहा कि उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत सरकार अगर हंगू जिले से सेना नहीं बुलाती है तो आतंकवादी बंधक बनाए सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों को मारना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मांगे न माने जाने पर पाकिस्तान में तालिबान कमांडर बैतुल्लाह मेहसूद के नेतृत्व वाले जिरगा द्वारा इन बंधकों की एक-एक कर हत्या करने की तारीख तय की जाएगी।
पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पीपीपी और उसकी प्रमुख सहयोगी पीएमएल-एन के बीच मौजूद मतभेदों के कारण बनी नॉन गवर्नेंस की स्थिति तालिबान को अपना प्रभाव मजबूत करने के लिए अच्छा मौका दे रही है।