दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद केन्द्र ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक में देश की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने बम धमाकों के मामले में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया है। इन विस्फोटों में चौबीस लोगों की मौत हो गई थी और एक सौ से अधिक घायल हो गये थे। दिल्ली पुलिस ने छह संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें से दो राजधानी के पुराने शहर से और दो अन्य ओखला इलाके से हैं। इन लोगों के प्रतिबंधित स्टूडेन्टस इस्लामिक मूवमेंट आफॅ इंडिया सिमी नाम के गिरोह से संबंध बताये गये हैं। केन्द्रीय सुरक्षा एजेन्सियां और पुलिस इन लोगों से पूछताछ कर रही हैं। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने दावा किया कि उन्हें कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं लेकिन इनका बयौरा देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि मामले को जल्द सुलझा लिया जायेगा।
प्रारंभिक जांच-पड़ताल से इन विस्फोटों के पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गिरोह का हाथ बताया जा रहा है। इस सिलसिले में पुलिस दल उत्तर प्रदेश और राजस्थान के लिये भेजे जा चुके हैं। दिल्ली पुलिस अपराधियों के रेखाचित्र तैयार करने के प्रयास कर रही है।सुरक्षा स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि तंकवादियों की तमाम कोशिशों को विफल कर दिया जायेगा और दोषियों को सजा दिलायी जायेगी।गृह मंत्रालय ने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाने को कहा है।
प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल का दौरा किया जहां विस्फोट में घायल ६९ लोगों का इलाज चल रहा है। उधर, मुम्बई पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने चैम्बूर के उस फ्लैट के मालिक से पूछताछ की है जिसके पते से आतंकवादी विस्फोट होने के बारे में ई-मेल भेजा गया था। इस बीच विस्फोट स्थलों का जायजा लेकर लौटे
बम धमाकों के बाद राजधानी में जो डर का माहौल बना हुआ था, उसके कारण सुबह तो लोग सड़कों और बाजारों पर कम दिखाई दिये लेकिन शाम होते-होते दिल्ली फिर अपनी उसी पुरानी रफ्तार में आ गई और बाजारों में पहले की तरह चहल-पहल देखी गई। इंडिया गेट में हालांकि बहुत भीड़ नहीं थी, फिर भी लोग छुट्टी के दिन निडर होकर घूमने के लिए यहां आये।कनॉट प्लेस जो दिल्ली का दिल कहा जाता है, जहां धमाके हुए थे, वहां जनजीवन सामान्य था।दिल्ली की यही सबसे बड़ी खूबी है कि किसी भी बड़ी घटना के बाद यहां लोगों में जीने का उत्साह कम नहीं होता और जिंदगी फिर सामान्य रफ्तार से दौड़ने लगती है। घूमिये जरूर लेकिन रहिये सतर्क।
पिछले सिलसिलेवार धमाके
26 जुलाई 2008- अहमदाबाद में 16 धमाकों में 49 लोगों की मौत हो गई।
25 जुलाई 2008- बंगलौर में सात धमाके हुए जिनमें दो लोग मारे गए।
13 मई 2008- जयपुर में सात धमाके हुए, कम से कम 63 लोग मारे गए।
1 जनवरी 2008 - उत्तर प्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर पर हुए चरमपंथी हमले में सात सुरक्षाकर्मियों समेत आठ लोग मारे गए और छह लोग घायल हुए।
25 अगस्त 2007- हैदराबाद में हुए बम विस्फोट में 42 लोग मारे गए और लगभग सौ लोग घायल हुए।
23 नवंबर 2007 - उत्तर प्रदेश में लखनऊ, फ़ैज़ाबाद और वाराणसी की कचहरियों में हुए बम धमाकों में 13 लोग मारे गए और 75 घायल हुए।
18 फ़रवरी 2007- दिल्ली से अटारी जा रही समझौता एक्सप्रेस में हुए दो धमाकों में 66 लोग जलकर मारे गए जिसमें से अधिकतर पाकिस्तानी थे।
18 मई 2007- हैदराबाद की मक्का मस्जिद में नमाज़ के दौरान हुए धमाके में 11 लोग मारे गए और दर्जनों लोग घायल हुए।
11 अक्तूबर 2007 - राजस्थान में अजमेर स्थित ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए धमाके में दो लोग मारे गए और 14 लोग घायल हुए।
7 मार्च 2006: वाराणसी में हुए तीन धमाकों में कम से कम 15 लोग मारे गए जबकि 60 से ज़्यादा घायल हुए।
11 जुलाई 2006: मुंबई में कई ट्रेन धमाकों में 180 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।