केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय से स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमैंट ऑफ इंडिया सिमी पर लागू प्रतिबंध हटाने के आदेश पर लगी रोक बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस संगठन पर अहमदाबाद और बंगलूर में हाल में हुए बम धमाकों सहित कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।एक विशेष ट्रायब्यूनल ने सिमी की गतिविधियों पर लगा प्रतिबंध हटाने के आदेश दिये थे लेकिन उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन् की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस महीने की छह तारीख को इस आदेश के अमल पर रोक लगा दी थी ।
केन्द्र ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय ने दस्तावेजों और देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियों इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और अन्य एजेंसियों के 75 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के तर्कों की अनदेखी की। अपील में कहा गया कि हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में हुए बम विस्फोटों में सिमी मुख्य संदिग्ध में रूप में सामने आया है और गुजरात पुलिस ने सिमी के दस कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों ने प्रतिबंधित सिमी का नामकरण इंडियन मुजाहिदीन कर दिया है और उन्होंने विस्फोटों की जिम्मेदारी भी ली है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, सिमी आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है और केन्द्र सरकार ने उसे अवैधानिक गतिविधियां नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया था। अपील के अनुसार, उच्च न्यायालय ने गत पांच अगस्त को 260 पृष्टों से अधिक के अपने फैसले में गलत निष्कर्ष निकाला कि सिमी पर प्रतिबंध को न्यायोचित बताने के लिए उसके विरुद्ध ताजा साक्ष्य नहीं मिले हैं। केन्द्र ने वर्ष 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगाया था और वर्ष 2006 में उस प्रतिबंध को दो वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था।