झारखंड मुक्ति मोर्चा ने झारखंड की मधु कोड़ा सरकार से समर्थन वापस ले लिया है जिससे राज्य सरकार अल्पमत में आ गई है। गहमागहमी के बाद झामुमो नेता शिबू सोरेन ने राज्यपाल को समर्थन वापसी का पत्र सौंप दिया। हालाँकि ख़ुद मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके झामुमो नेता शिबू सोरेन ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है। समर्थन वापसी का पत्र सौंपने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैंने अपनी ओर से महामहिम से कुछ भी नहीं कहा है. उन्हें फ़ैसला करने दीजिए।" ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफ़ारिश भी कर सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष समेत 82 सदस्यीय विधानसभा में मधु कोड़ा को 42 विधायकों का समर्थन प्राप्त था जो बहुमत से महज एक ज़्यादा था। लेकिन झामुमो के 17 विधायकों का समर्थन खो देने के बाद सरकार अल्पमत में आ गई है।समर्थन वापस लेने के साथ ही राज्य सराकर में झामुमो कोटे के तीन मंत्रियों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया। इनमें उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो शामिल हैं।
झामुमो ने परमाणु क़रार के मुद्दे पर यूपीए सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।इसके बदले में शिबू सोरेन अब समर्थन के बदले मुख्यमंत्री पद का वादा याद दिला रहे हैं।उन्होंने दावा किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला काफी पहले कर लिया था और अब उसे अमली जामा पहनाने का समय आ गया है।
उधर भारतीय जनता पार्टी ने सोरेन या कोड़ा में किसी को भी समर्थन देने से इनकार किया है और तत्काल विधानसभा चुनाव कराए जाने की माँग की है।भाजपा उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कहा कि एक बार निर्दलियों के साथ अपने हाथ जला चुके हैं और उनकी पार्टी के झामुमो के साथ जाने की कोई संभावना नहीं है।
फिलहाल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद मधु कोड़ा सरकार का बाहर से समर्थन कर रहे हैं।विधानसभा में झामुमो के 17, कांग्रेस के नौ, राजद के सात, एएजेएसयू के दो, फॉरवर्ड ब्लाक के दो, यूएनजीडीपी के दो, जेकेपी और भाकपा माले के एक-एक और पांच निर्दलीय सदस्य हैं। विपक्षी भाजपा के सदन में 29 विधायक हैं, जबकि इसकी सहयोगी जद-यू के चार विधायक हैं। एक सीट जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या के कारण रिक्त है।