सीआरपीएफ के आईजी को जिम्मेदारी निभाने पर दिया तबादले का इनाम और राष्ट्रपति के पुलिस पदक की सूची से हटाया नाम। कश्मीर घाटी में अलगावादियों को मुजफ्फराबाद जाने से रोकने तथा पुलिस पर हमले से बचने के लिए फायरिंग का आदेश देने वाले सीआरपीएफ के आईजी सुनील जैन को कट्टरपंथियों की गीदड़ भभकी मिलते ही केन्द्र सरकार ने उनका तबादला दिल्ली कर दिया और गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने तुरंत चुस्ती दिखाते हुये अपनी मर्जी से सुनील जैन का नाम उस सूची से काट दिया जो रा ट्रपति के पुलिस मैडल के लिए तैयार की गई थी।
गौरतलब है कि सईद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूख व पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफती जैसे अलगाववादियों के उकसावे पर देश की संप्रभुता को चुनौती देकर जबरन मुजफ्फराबाद मार्च करने पर आमादा कश्मीरियों की उग्र भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को गोलियां चलानी पड़ी थीं। उसमें एक पूर्व आतंकी समेत २९ उन्मादी मारे गये। ये लोग पुलिस की बंदूकें छीन कर उसपर ही हमला करने की कोशिश भी कर रहे थे। गोलीबारी में हुई मौतो के बाद अलगावादियों को ठण्डा करने के लिए आईजी सुनील जैन पर गाज गिराते हुये उन्हें सीआरपीएफ मुख्यालय दिल्ली बुला लिया गया है।
जब कईं दिनों से मालूम था कि अलगाववादी मुजफ्फराबाद मार्च करने वाले हैं तो उस वि ाय को गृहमंत्री ने बड़े हलके ढंग से यह कहकर टाल दिया उस मार्च को रोकना राज्य सरकार का काम है। लेकिन हजारों की उन्मादी भीड़ के सामने नियंत्रण से बाहर हालत होने पर गोली चलानी पड़ी तो केन्द्र अब सुरक्षा बलों के अधिकारियों को बलि का बकरा बना रहा है। सीआरपीएफ के कईं अफसरों ने सरकार से जबाव मांगा कि जब हजारों उन्मादी नियंत्रण रेखा पार करने के लिए उग्र हिंसक रूप धारण कर चुके थे तो उस स्थिति में उन्हें रोकने के लिए वे गोलीबारी न करके कौन सा तरीका अपनाते।
वहीं दूसरी ओर जम्मू में शहीद कुलदीप वर्मा के शव के साथ बेकद्री करने वाले डीएसपी मोहनलाल कैथ को ईनाम देकर विशेष ट्रेनिंग पर भेजा गया है। साम्बा में बिना किसी आदेश के निशाना साधकर गोली चलाने वाले एसएसपी प्रभात सिंह के उपर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। किश्तवाड़ में हालात खराब होने पर भी पुलिस, सीआरपीएफ व सेना को न लगाने वाले एसएसपी डा. हसीब मुगल को भी खुला छोड़ा हुआ है। किश्तवाड़ में हालात कई दिनों से खराब हो रहे थे। यह प्रशासन को अच्छी तरह मालूम था कि मुसलमान हिन्दुओं पर हमला करने वाले हैं। वहां पर सेना और सीआरपीएफ भी थी। लेकिन एसएसपी ने हमलावरों को खुली छूट दी हुई थी। उन्होंने जमकर हिन्दुओं की दुकानें लूटी, तिरंगे को जलाया, पाकिस्तान जिन्दाबाद के साथ उसका झण्डा भी फहराया। डीसी एसएसपी को सुरक्षा बल तैनात करने के लिए कहता रहा परन्तु उसने एक भी नहीं सुनी। डीसी ने डिवकाम को एसएसपी को सस्पैंड करने के लिए भी कहा। यह एसएसपी हुर्रियत का आदमी माना जाता है। जिसे प्रशासन के बड़े अफसरों की पूरी शह है और इसने हुर्रियत के कहने पर किश्तवाड़ के अनेक हिन्दू नेताओं की सुरक्षा वापिस लेकर उनको आतंकवादियों के भरोसे छोड़ दिया और केवल भरोसे ही नहीं छोड़ा उनके उपर अनेक उलटे-सीधे झूठे केस भी दर्ज कर लिये। यह सब जम्मू के उपर अत्याचार कर रहे हैं लेकिन इनके उपर कोई कार्यवाही नहीं होती।