यूपीए सरकार को 19 वोटों के अच्छे-खासे अंतर से विश्वास मत जीतने में कामयाब रही तो इसका योगदान सरकार का साथ देने वालों की बजाय विपक्षी दलों के बागी सांसदों को जाता है। एनडीए के 10 से ज़्यादा सांसदों ने क्रॉस वोटिंग या गैरहाज़िर रहकर सरकार की विश्वास मत जीतने में मदद की।
इनमें बीजेपी के सात सांसद हैं जिन्होंने अपनी पार्टी से बगावत की। ब्रजभूषण, चंद्रभान पटेल, हरिभाऊ राठौड़, मंजूनाथ, बाबू भाई कटारा, सोनाभाई पटेल और टी. एस. सांग्याल वोटिंग में बीजेपी को धोखा दे गए।
शिवसेना के सांसद तुकाराम तो नज़र ही नहीं आए। अब पार्टी ने उनके घर पर पहरा बिठा दिया है, क्योंकि वह घर पर भी नहीं हैं। यूएनपीए को जोड़ने में तेलुगु देशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू ने दिन रात एक कर दिया, लेकिन वह अपनी ही पार्टी को टूटने से नहीं बचा सके। उनकी पार्टी से दो सांसद अधिकेश्वर अलू और जगन्नाथ उन्हें धोखा देकर यूपीए से जा मिले।
बीजू जनता दल का भी एक सांसद धोखा दे गया। इस सांसद को बीजेडी ने पार्टी से निकाल दिया है। इसके अलावा जेडीएस और अकाली दल के भी एक-एक सांसद ने अपनी पार्टियों की बजाय यूपीए का साथ दिया। कुल मिलाकर दस सांसदों ने अपनी-अपनी पार्टियों के विप को ना मानते हुए क्रॉस वोटिंग की और बाकी सदन से गैरहाज़िर रहे।