डा० मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार लोकसभा में रखे गए विश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान में विजयी रही है। प्रस्ताव पर हुए मत-विभाजन में सरकार के पक्ष में 275 वोट पड़े, जबकि विरोध में 256 सांसदों ने मत व्यक्त किया। दस सांसदों ने मत विभाजन में हिस्सा नहीं लिया। इस तरह कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार, 19 मतों से जीत गई। डा० मनमोहन सिंह द्वारा लोकसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव कल पेश किया गया था, जिस पर दो दिन लंबी बहस चली।
बहस का प्रमुख आकर्षण कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी का भाषण रहा। श्री गांधी ने सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भारत को विश्व शक्ति बनाने के लिए सहयोग देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत-अमरीका असैन्य परमाणु समझौता न केवल भारत के साथ परमाणु क्षेत्र में हो रहे भेदभाव को समाप्त करेगा बल्कि इससे देश की गरीबी दूर करने में भी मदद मिलेगी।
बहस को आगे बढ़ाते हुए सुबह वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि समझौते से परमाणु क्षेत्र में भारत के अलगाव को समाप्त करने का नया रास्ता खुलेगा। वाम दलों, और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के परमाणु समझौते के प्रति रवैये पर सवाल उठाते हुए श्री चिदम्बरम ने कहा कि वाम दल जहां पूरी तरह समझौते के खिलाफ हैं वहीं एनडीए अमरीका के साथ सामरिक साझेदारी चाहता है।
विश्वास मत का विरोध करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा ने दावा किया कि आर्थिक विकास का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता के कारण ही भारत में मुद्रास्फीति की दर विश्व में सबसे अधिक है।सबसे बड़ा अपराध आकाश को छुती हुई कीमतें करोड़ों लोगों को कमरतोड़ती हुई महंगाई, गरीब आदमी की थाली उसमें से पहले आधी हो जाए और दिन में उसको भूखा रहना पड़े ये यहां पर हालत पैदा हो गई है।
रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इन शंकाओं को बेबुनियाद बताया कि यह समझौता किसी खास समुदाय के खिलाफ है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कथित सांप्रदायिक एजेंडे पर हमला करते हुए वाम दलों को सावधान किया ।
मनमोहन सिंह सरकार के समर्थन में भाषण देते हुए जम्मू-कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने कहा कि परमाणु समझौता समूचे देश के हित में है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि समझौता मुसलमानों के खिलाफ है। श्री अब्दुल्ला ने कहा कि समझौते के लाभ को देखते हुए ही वे यूपीए का घटक न होने के बावजूद विश्वास मत का समर्थन करते हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने भी विश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किए हैं। उन्होंने इस दावे को निराधार बताया कि समझौता किसी भी प्रकार से मुसलमानों के हितों के खिलाफ है। तेलुगू देशम पार्टी के येरन नायडू ने विश्वास मत के खिलाफ विचार व्यक्त किए।