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Tue, 22 Jul 2008 09:45:00

संसद मे नेताओ की वाणी

प्रणव मुखर्जी- जिस तरह पासपोर्ट के बिना वीजा नहीं मिल सकता, उसी तरह आईएईए के पास गए बिना एनएसजी नहीं जाया जा सकता। हमारे पास पासपोर्ट और वीजा (आईएईए और एनएसजी की मुहर) होने तो दीजिए, यह हम पर निर्भर करेगा कि हम यात्रा करें कि न करें
संसद

मनमोहन सिंह

वाम दलो ने ऐसे समय में सरकार से समर्थन वापस लिया है, जब सरकार लोगों को मुद्रास्फीति और महंगाई से निजात दिलाने के आर्थिक और वित्तीय कदम उठाने में जुटी थी तथा जनहित के कार्यक्रमों पर अमल की गति तेज कर रही थी।  -मैंने जब से कार्यभार संभाला है, जो भी काम किए देशहित में किए। यदि हम चार साल से अधिक के कार्यकाल के बाद यहां हैं, तो इसका श्रेय यूपीए के नेताओं, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व और ज्योति बसु, हरकिशन सिंह सुरजीत और करुणानिधि के बुद्धिमान और दूरदर्शी नेतृत्व को जाता है।

लालकृष्ण आडवाणी, बीजेपी- यूपीए सरकार की हालत आईसीयू में भर्ती मरीज की तरह है। सबके मुंह पर केवल यही सवाल है कि सरकार बचेगी या जाएगी। सरकार गिरने के लिए दोषी खुद मनमोहन होंगे। इसके लिए वह विपक्ष या वाम दलो को दोष न दें। यह आफत सरकार ने खुद मोल ली है। यदि इस सरकार ने गठबंधन धर्म अपनाया होता तो आज यह स्थिति नहीं आती। प्रधानमंत्री परमाणु करार पर ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, जैसे यह समझौता दो देशों के बीच नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के बीच हो।प्रधानमंत्री अपनी अल्पमत सरकार को बहुमत में बदलने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिलेगी और सरकार का जाना अब तय है। बीजेपी ने कभी भी सरकार को अस्थिर नहीं किया। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, देवेगौड़ा और वाजपेयी की सरकारों को अस्थिर किया था। वाजपेयी की सरकार को उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री से वोट डलवाकर गिराया गया था।

प्रणव मुखर्जी- देश के इस सबसे बड़े न्यायालय के न्यायाधीशों का फैसला हम स्वीकार करेंगे। यह सदस्यों पर है कि वे इस समझौते को स्वीकार करें, खारिज करें या आंशिक रुप से स्वीकार करें। जिस तरह पासपोर्ट के बिना वीजा नहीं मिल सकता, उसी तरह आईएईए के पास गए बिना एनएसजी नहीं जाया जा सकता। हमारे पास पासपोर्ट और वीजा (आईएईए और एनएसजी की मुहर) होने तो दीजिए, यह हम पर निर्भर करेगा कि हम यात्रा करें कि न करें।

करार के बारे में हर बात वाम दलो को विश्वास में लेकर की गई। अपने दिल पर हाथ रखिए, क्या आप महसूस करते हैं कि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर किसी सरकार को गिराया जाना चाहिए।

वीरप्पा मोइली, कांग्रेस मीडिया प्रभारी- हम कभी अल्पमत में नहीं थे। वाम  के समर्थन वापस लेने के बावजूद हमारी तरफ 276 सदस्य थे। मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि हमारे पास 280 से अधिक सांसदों का समर्थन है और बना रहेगा। यूपीए के प्रति वाम का गुस्सा उनकी हताशा मात्र है। वे यूपीए सरकार को हराने का जो सपना देख रहे हैं, वह कभी पूरा होने नहीं वाला।

राम गोपाल यादव, एसपी- सरकार की चार साल की कमियों के लिए वाम भी कम दोषी नहीं है। आपने सरकार से हर काम अपनी पसंद का करवाया। आपने प्रधानमंत्री को बंधुआ मजदूर बनाने की कोशिश की। सिर्फ आपकी वजह से आज चुनाव आयोग को 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री की नीयत और ईमानदारी पर हमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। संविधान में किसी संधि की संसद से पुष्टि कराने का प्रावधान न होने के बावजूद भी उन्होंने दो बार इस समझौते पर चर्चा कराई है और अब इस मुद्दे के चलते विश्वासमत प्रस्ताव भी पेश किया है।।

लालू प्रसाद, आरजेडी- हमारे सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार का समर्थन करने वाले सांसदों की संख्या अब 291 के आंकड़े को पार कर गई है। लोकसभा में हम बड़ी विजय हासिल करने जा रहे हैं।

देवेंद्र प्रसाद यादव, राष्ट्रीय जनता दल- भारत को विकसित देशों के कतार में खड़े होने और परमाणु ताकत बनने के लिए तकनीक जरूरी है और यह करार इसमें सहायक होगा।

टी. आर. बालू, डीएमके नेता- बिजली विकास के लिए आवश्यक है और देश में बिजली की कमी को दूर करने के लिए परमाणु ऊर्जा समय की मांग है।

मायावती, बीएसपी नेता- जैसे ही परमाणु करार अस्तित्व में आएगा, वैसे ही ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो इससे विश्व की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान भारत जैसे विकासशील और प्रगति की ओर बढ़ रहे राष्ट्र को उठाना पड़ सकता है।

बृजेश पाठक, बीएसपी नेता- परमाणु समझौता भारत का गुलामी की ओर बढ़ाया गया कदम है। इससे देशवासियों का रत्तीभर फायदा नहीं होगा, इसलिए इसे रद्दी की टोकरी में फेंक देना चाहिए।

नीलोत्पल बसु, सीपीएम- सिंह का बयान एकपक्षवाद में उनके विश्वास का दोहराव था। उन्होंने परमाणु करार पर आगे बढ़कर न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर हुई सहमति का उल्लंघन किया है, क्योंकि पार्टियों में इस मामले में कोई सहमति नहीं हुई थी।

सीताराम येचुरी, सीपीएम- सरकार ने करार पर आगे बढ़ने के पहले विचार के आश्वासन पर हमारा भरोसा तोड़ा है। विश्वासमत के बाद भी अगर सरकार करार को लेकर जिद पर अड़ी रहती है तो हम अपने विरोध को और तेज करेंगे।जो पैसा परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए खर्च किया जाएगा, उसे देश में नए स्कूल खोलने पर व्यय किया जाना चाहिए।

मोहम्मद सलीम, सीपीएम- वाम  ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर यूपीए को समर्थन दिया था। साझा कार्यक्रम यह नहीं था कि अमेरिका के साथ साझेदारी की जाए।


 


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