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Mon, 21 Jul 2008 14:10:00

लोकसभा मे विश्वास मत पर बहस शुरु

मनमोहन सिंह ने यूपीए गठबंधन बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले नेताओं विशेष तौर पर करुणानिधि, ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत का शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह के दोहे - 'दे शिवा वर मोहे, शुभ करमन तें कबहुँ न टरों...' के साथ भाषण समाप्त किया
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बाद यूपीए सरकार ने संसद में विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। सरकार की तरफ़ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्वास प्रस्ताव रखा - 'सदन मंत्रिपरिषद में अपना विश्वास व्यक्त करता है.' इस विश्वास प्रस्ताव पर बहस के लिए 12 घंटे का समय दिया गया है लेकिन ज़रुरत पड़ने पर यह समय बढ़ सकती है।

प्रधानमंत्री ने क़रीब सात मिनट के भाषण में कहा कि पूर्व में भी कई सरकारों को विश्वास मत हासिल करना पडा है और पहले तो कई सरकारों को सत्ता में आने के दो तीन महीने में ही ऐसा करना पडा लेकिन यूपीए सरकार के लिए चार साल के बाद यह मौका आया है। उल्लेखनीय है कि वाम दलों के अमरीका के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लेने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें समर्थन वापसी की जानकारी तब मिली जब वो जी-9 की बैठक में थे।

उन्होंने कहा, "इस स्थिति से बचा जा सकता था. हम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से बात कर रहे थे। अगर ये बातचीत आगे बढ़ने दी जाती तो मैं खुद ही संसद के पास आता और परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने के बारे में सांसदों से दिशा निर्देश लेता कि इसमें आगे कैसे बढ़ा जाए।" प्रधानमंत्री का कहना था कि वाम दलों ने ऐसे समय में समर्थन वापस लिया जब देश मंहगाई जैसे मुद्दे से जूझ रहा था और सरकार आम लोगों को राहत दिलाने की कोशिश में लगी थी।

उन्होंने कहा कि वाम दलों की समर्थन वापसी के बाद राष्ट्रपति के निर्देश पर वो विश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं और उम्मीद जताई कि सभी सांसद सरकार के रिकार्ड को ध्यान में रखेंगे। उनका कहना था, हमने हर नीति बनाने से पहले लोगों के हितों को ध्यान में रखा है और इन नीतियों के ज़रिए हमने देश को 21 वी सदी के लिए तैयार करने की कोशिश की है।

मनमोहन सिंह ने यूपीए गठबंधन बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले नेताओं विशेष तौर पर करुणानिधि, ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत का शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह के दोहे - 'दे शिवा वर मोहे, शुभ करमन तें कबहुँ न टरों...' के साथ भाषण समाप्त किया।

प्रस्ताव का विरोध करते हुए  विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा यूपीए सरकार ख़ुद इस विश्वास प्रस्ताव की बहस के लिए ज़िम्मेदार है जबकि अर्थव्यवस्था, महँगाई और कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की ज़रूरत हैं।

आडवाणी का कहना था, "चुनाव से कुछ महीने पहले यदि ये बहस हो रही है तो इसकी ज़िम्मेदार सरकार ख़ुद है और प्रधानमंत्री जी विशेष तौर पर है. एक साल पहले जब उन्होंने एक अख़बार को इंटरव्यू में कहा कि यदि वाम मोर्चा परमाणु समझौते से सहमत नहीं तो वह जो फ़ैसला करने चाहे कर सकता है. तब से लेकर पिछले एक साल तक सरकार को जैसे लकवा ही मारा रहा है।"

आडवाणी का कहना था, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज़ की तरह है और स्वाभाविक है कि ये सवाल पूछा जाए कि क्या ये मरीज़ बचेगा या नहीं?"

उधर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मोहम्मद सलीम ने बहस में हिस्सा लेते हुए यूपीए को निशाना बनाया और कहा कि सवाल विश्वसनीयता का है. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री यह कह कर विश्वास प्रस्ताव लाए कि सदन को मंत्रिपरिषद में विश्वास है लेकिन सवाल यहां विश्वसनीयता का ही है. विश्वास तोड़ा गया है।"

उन्होंने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वाम दलों ने यूपीए के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर समझौता किया था लेकिन कांग्रेस सरकार ने अमरीका के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना लिया।  लोक सभा मे बहस जारी है ।

सलीम का कहना था कि यह सभी जानते हैं कि कई नीतियों पर कांग्रेस और वाम दलों के मतभेद हैं मसलन विनिवेश, आर्थिक नीति लेकिन विदेश नीति के मसले पर कांग्रेस अपनी ही नेताओं के सुझाए हुए रास्ते का विरोध करेगी.

इससे पहले दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गठबंधनों ने अपने-अपने समर्थक सांसदों की एकजुटता सुनिश्चित करने के लिए रात्रि भोज दिए, जिनमें दो विद्रोही सांसद सबके ध्यान का केन्द्र बने रहे। यूपीए के नेता विश्वास मत हासिल करने के बारे में आश्वस्त हैं । यूपीए के सभी घटक दल, कांग्रेस के शीर्ष नेता, कुछ निर्दलीय सांसद और दल बदलकर समाजवादी पार्टी में आये भारतीय जनता पार्टी के विद्रोही सांसद ब्रज भूषण सरन सिंह भी प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के रात्रिभोज में मौजूद थे। रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि यूपीए विश्वास मत प्राप्त कर लेगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबु सोरेन ने भी अपने चार सांसदों के साथ रात्रि भोज में हिस्सा लिया। यूपीए ने दो सांसदों वाली नेशनल कांफ्रेंस को भी न्योता भेजा था, लेकिन इस पार्टी का एक भी सांसद रात्रि भोज में नहीं था।

एनडीए की ओर से भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने संसद सौध में रात्रिभोज रखा, जिसमें सबका ध्यान कांग्रेस के विद्रोही सांसद कुलदीप बिश्नोई पर था। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी के निवास पर एक बैठक हुई जिसमें  विशेष सत्र के दौरान सदन में पार्टी की रणनीति परचर्चा हुई।

आंकड़ों के खेल में यूपीए गठबंधन 272 के बहुमत के आंकड़े के काफी पास पहुंच गया है। खबर है कि भाजपा और जनता दल यूनाइटेड के कुछ सांसद सरकार के समर्थन में पाला बदल सकते हैं और शिवसेना, शिरोमणि अकाली दल तथा बीजू जनता दल के कुछ सांसद मतदान के दौरान अनुपस्थित भी रह सकते हैं।

उन्होंने यूपीए सरकार को गिराने के प्रयास के लिए भाजपा, वाम दलों और बहुजन समाज पार्टी की कड़ी आलोचना की। उन्तालीस में पैंतीस लोग समाजवादी पार्टी के अटूट हैं और आठ बहुजन समाज पार्टी के लोग और भारतीय जनता पार्टी के लोग हमारे संपर्क में हैं।  इससे पहले पांच सांसदों वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यूपीए सरकार को समर्थन देने का संकल्प व्यक्त किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबु सोरेन ने प्रधानमंत्री डॉ० मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के साथ मुलाकात के बाद इस फैसले की घोषणा की।

लोकसभा में तीन-तीन सांसदों वाले राष्ट्रीय लोकदल और जनता दल-एस  ने विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान की घोषणा की है। राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह ने वाम दलों और यूएनपीए के कई सदस्यों तथा बसपा अध्यक्ष मायावती के साथ बातचीत के बाद यूपीए के खिलाफ वोट देने का फैसला किया है।     

राजनीतिक परिस्थिति पर अपने-अपने विचार हमारे में आपस में विचार हुआ, हम सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे। जनता दल सेकुलर के नेता देवेगौड़ा ने घोषणा की है कि उनके तीनों सांसद सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे। यूएनपीए, बसपा और वामपंथी दल यूपीए सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए एकजुट हो गए हैं। सुश्री मायावती ने नई दिल्ली में बताया कि यूपीए सरकार गिराना ही उनका एकसूत्री कार्यक्रम है।
  
हम सभी नेताओं ने बैठकर फिलहाल तो यूपीए सरकार  को सत्ता से बाहर करना है। इसको लेकर एकसूत्री कार्यक्रम तय किया गया है कि 22 तारीख को यूपीए सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव पर जो मतदान होगा इस प्रस्ताव को गिराना है, सरकार को गिराना है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारात ने कहा कि विश्वास मत के बाद 23 जुलाई को वे फिर मिलेंगे और अपनी संयुक्त रणनीति तय करेंगे। जेडीयू के दो सांसद पी पी कोया और रामस्वरूप प्रसाद ने खुलेआम घोषणा की है कि वे विश्वास मत पर सरकार का समर्थन करेंगे।

 


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