केंद्र की यूपीए सरकार को बचाने और गिराने के लिए जारी जोड़तोड़ के बीच पार्टियों ने अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।
राजनीतिक नजरिए से देश के सबसे अहम और बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) हिंदी पट्टी में लगातार जमीन खोती जा रही बीजेपी को ऑक्सीजन देने के लिए एक बार फिर हिन्दुत्व को हथियार बनाने की तैयारी में हैं।
हालाँकि वीएचपी ने समर्थन के बदले एक शर्त रखी है। वीएचपी के मुताबिक लोकसभा चुनाव में वीएचपी का समर्थन उसी उम्मीदवार को मिलेगा जो एक शपथ पत्र पर दस्तखत करेगा। शपथ पत्र में हिन्दुत्व के एजेंडे पर काम करने की शर्त होगी।
वहीं आरएसएस ने बिना किसी शर्त के बीजेपी के लिए यूपी में हिंदुत्व का माहौल बनाकर पार्टी के लिए काम करने का ऐलान किया है। यूपी में राजनैतिक रूप से हाशिए पर धकेल दी गई बीजेपी को सेंटर स्टेज पर लाने का बीड़ा वीएचपी और संघ ने उठा लिया है।
दोनों संगठन हिंदुत्व का पुराना राग यूपी में फिर अलापेंगे। वीएचपी और आरएसएस ने हिंदुत्व के मुद्दे लेकर सूबे के सभी गाँवों में जाकर जन जागरण अभियान चलाएँगे। वीएचपी की पिछले महीने 14 जून को हरिद्वार में हुई तीन दिन बैठक में यह फैसला लिया गया है कि वह उन उम्मीदवारों को समर्थन देगी जो शपथ पत्र देकर हिन्दुत्व के मुद्दों पर साथ देने की कसमें खाएँगे।
करार के तहत जिन बातों पर उम्मीदवार को हामी भरनी होगी, उनमें गंगा जल को धारा प्रवाह बहने पर समर्थन, राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर बनाना, राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर संसद में समर्थन के साथ साथ दक्षिण भारत के मठों की सुरक्षा बढ़ाना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वीएचपी बैठक में यह भी फैसला लिया गया है कि देश के हर जिले की कमान एक संत को सौंपी जाएगी जो हिन्दुत्व को लेकर गाँव-गाँव जागरुकता लाने का काम करेंगे।