देश के राजनीतिक और संसदीय इतिहास में 22 जुलाई की रात को एक नया रोमांचक अध्याय जुड़ जाएगा।
कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने यदि विश्वासमत हासिल कर लिया तो डॉ. मनमोहन सिंह ऐसी उपलब्धि अपनी झोली में डालने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री कहलाएंगे। अब तक के संसदीय इतिहास में पांच प्रधानमंत्रियों ने लोकसभा में विश्वासमत हासिल करने का प्रयास किया और पांचों ही उसमें असफल रहे। वे प्रधानमंत्री थे- स्व. मोरारजी देसाई और चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, एचडी देवगौड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी।
इनमें से मोरारजी देसाई ने स्थिति को भांपकर सदन में विश्वासमत के प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बने चरण सिंह को लोकसभा का विश्वास हासिल करना था लेकिन वह सदन का सामना ही नहीं कर सके। विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार कांग्रेस और भाजपा द्वारा विरोध में मतदान के परिणामस्वरूप सदन में विश्वासमत के प्रस्ताव पर हार गई थी।
देवगौड़ा ने कांग्रेस का समर्थन नहीं मिलने के कारण विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही त्यागपत्र दे दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी 1996 में सदन में मतदान से पहले ही अपनी 13 दिन की सरकार का इस्तीफा देने पर विवश हो गए थे जबकि 1998 में उनकी सरकार विश्वासमत का प्रस्ताव एक वोट से हार गई थी।