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Tue, 13 May 2008 19:29:00

शरणार्थी हिंदुओं के प्रति सहानुभूति

अमेरिका के यहूदी मानवाधिकार कार्यकर्ता डा. रिचर्ड बेंकिन ने पिछ्ले दिनों भारत की यात्रा की और पश्चिम बंगाल के उन शिविरों में गये जहाँ बांग्लादेश से आये हिन्दू शरणार्थी अपना जीवन यापन कर रहे हैं। बांग्लादेश से सटी सीमाओं का दौरा करने के उपरांत डा. बेंकिन अनेक निष्कर्षों पर पहुँचे और उनके इन्हीं अनुभवों पर आधारित यह आलेख हैं।
बांग्लादेशी हिन्दू

शिकागो। अमेरिकी-यहूदी कार्यकर्ता डॉ रिचर्ड बैंकिन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान बंग्लादेश से प्रताड़ित करके निकाले गए हिंदू शरणार्थियों से मुलाकात की। अपनी इस यात्रा के दौरान दिल्ली और लखनऊ में उन्होंने प्रेस और विश्विद्यालयों में अपना पक्ष रखा और पश्चिम बंगाल की यात्रा की, खास करके उन हिस्सों की जो बंग्लादेश, नेपाल और चीन की सीमा से सटा हुआ है।

 

लगभग दर्जन भर शरणार्थी शिविरों में लोगों से उनकी आपबीती जानने के बाद उन्होंने पाया कि उनमें से कुछ की कालोनियां ही वैध है। बैंकिन के अनुसार शुरुआत में शरणार्थी कुछ भी कहने को तैयार नहीं थे, खासकर उन अप्रवासी इस्लामवादियों के बारे में जो सीमा पार करके बंग्लादेश से अभी भी भारत आ रहे हैं। लेकिन चौथे शरणार्थी शिविर में एक बूढ़ी महिला ने कहा कि वो किसी से नहीं डरती और अप्रवासी इस्लामवादियों द्वारा बंग्लादेश और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती गांवों पर हुए हमलों के बारे में बताया। अप्रवासी इस्लामवादियों को अपना काम करने की छूट देने के लिए उसने पश्चिम बंगाल सरकार की भी आलोचना की। हर शरणार्थी शिविर में ऐसा ही माहौल था और उस महिला के अलावा अन्य पीड़ितों का भी यही कहना था कि अतिवादियों ने बंग्लादेश और यहां की स्थानीय सरकार के सहयोग से उनपर हमला किया। 

 

सिलीगुड़ी में एक आम सभा को संबोधित करते हुए बैंकिन ने उपस्थित लोगों को यह बताया कि वे शरणार्थियों की हर संभव मदद करेंगे, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इनके भाग्य का फैसला उन्हें करना है और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि नेताओं और आम जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में साथ देना होगा। उन्होंने कहा कि एक भ्रष्ट नेता वेश्या से भी गिरा हुआ होता है वेश्या तो सिर्फ पैसे के लिए अपने शरीर को ही बेचती है लेकिन नेता तो पूरे समाज को बेच देता है। बाद में उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि उपस्थित लोगों में से कुछ लोग पैसे के दुरुपयोग के मामले में पहले से ही संलग्न थे।

 

सिलीगुड़ी में एक शरणार्थी शिविर में एक लड़की ने उनसे यह कहा कि वह बंगाली होने पर गर्व महसूस करती है उसका यह भी कहना था कि शरणार्थी शिविर में उपस्थित लोग जो कष्ट उठा रहे हैं वो उससे बेहतर योग्यता रखते हैं। वह लड़की शिक्षक बनना चाहती है ताकि वह अन्य बंगालियों में भी वही गर्व और प्रतिबद्धता की भावना पैदा कर सके। बैंकिन ने उसे बताया कि हम इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम कर रहे हैं

 

अमेरिका वापस लौटने से पहले बैंकिन लंदन गए जहां पर उन्होंने बंग्लादेशी हिंदुओं के पक्ष में और सहयोग जुटाने के लिए प्रयास किया। अब उनका लक्ष्य अन्य संस्थानों, मीडिया और अमेरिकी कांग्रेस में इस बारे में आवाज उठाना है।

 

बंग्लादेश द्वारा कुचले गए, भारत द्वारा नकारे गए और अंततः उन लोगों द्वारा धोखा खाए हुए जो यह दिखाते हैं कि वो इनकी मदद कर रहे हैं, ये बंग्लादेशी हिंदू शरणार्थी जातीय हिंसा के कारण खात्मे की कगार पर पहुंच गए हैं और उन्हें हमारा सहयोग चाहिए


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