पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में अपने हस्तक्षेप का स्तर बढ़ाते हुए वहां जनमत संग्रह के पक्ष में दुनिया भर में माहौल बनाने का फैसला किया है। मंगलवार को पाकिस्तानी संसद ने जनमत संग्रह की हिमायत करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया।पीपल्स पार्टी के नेता और कानून मंत्री फारूख नायक ने यह प्रस्ताव पेश किया। संसद ने एक विशेष पैनल के गठन का भी फैसला किया, जो कश्मीर में मानवाधिकारों पर नजर रखेगा। उल्लेखनीय है, नई दिल्ली ने पिछले हफ्ते ही पाकिस्तान को आगाह किया था कि वह कश्मीर से दूर रहे क्योंकि यह भारत का अंदरूनी मामला है।
प्रस्ताव के मुताबिक पैनल देश-विदेश में कश्मीर मसले पर जागरूकता पैदा करेगा। वह जम्मू-कश्मीर की जनता को राजनैतिक, नैतिक और कूटनीतिक समर्थन दिलवाने के लिए काम करेगा। पैनल कश्मीर पर काम कर रहे संगठनों के कामकाज पर निगाह रखेगा और उन्हें आवश्यक दिशा देगा। यह पैनल पाकिस्तानी संसद द्वारा सौंपे जाने वाले मुद्दों पर भी गौर करेगा। गौरतलब है कि कई साल बाद पाकिस्तानी संसद ने इस तरह का भारत विरोधी प्रस्ताव पास किया है। कई बार खासतौर से मुशर्रफ शासन में ऐसा लगा कि पाकिस्तान आपसी बातचीत के जरिए कश्मीर समस्या का हल ढूंढने का इच्छुक है। शिमला समझौते में भी यही कहा गया था कि दोनों देश आपसी बातचीत में हल ढूंढेंगे। शिमला समझौते में कश्मीर समस्या के अंतरराष्ट्रीयकरण का वस्तुत: निषेध किया गया था। पाकिस्तान के इस प्रस्ताव से भारत-पाक संबंधों में नया तनाव तय है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान सहमत हों तो वह कश्मीर समस्या के समाधान के लिए मध्यस्थता करने को तैयार हैं। अभी तक दोनों पक्ष इसके लिए सहमत नहीं हुए हैं। इससे पहले मून ने कहा था कि हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। उनसे कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर टिप्पणी करने को कहा गया था।